AutoImmune Diseases / स्व – प्रतिरक्षित रोग

नमस्कार दोस्तों! आज हम बात करेंगे Autoimmune Diseases यानि स्व – प्रतिरक्षित रोगों के बारे में

Autoimmune Diseases बड़े ही जटिल रोग होते हैं कयोंकि ये हमारे Immune System से जुड़े होते हैं ।
आइये जानते हैं Autoimmune Diseases के बारे में

AutoImmune Diseases
AutoImmune Diseases

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AutoImmune Diseases

हमें Autoimmune Diseases को समझने से पहले यह समझना होगा की Immune System होता क्या हैं? आइए पहले इसे ही समझते हैं।

Immune System क्या होता हैं ?

हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) कोशिकाओं(cells ), ऊतकों(tissues) और अणुओं(molecules) का एक संग्रह है जो शरीर को किसी भी बाहरी तत्वों के हमले से बचाता हैं इन बाहरी तत्वों में बैक्टीरिया, वायरस, कवक(Fungi) आदि शामिल होते हैं।

Immune System हमारे शरीर का एक सुरक्षा कवच होता हैं जो हमारे शरीर को विभिन्न प्रकार के रोगो से लड़ने की शक्ति प्रदान करता हैं। हमारा immune system ही हमें बहुत हद तक स्वस्थ रखता हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली हमारे शरीर को हानिकारक पदार्थो से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

हमारे immune system के कारण हमारी कई बीमारिआ अपने आप ही ठीक हो जाती हैं।

शरीर में खुद को ठीक रखने या करने की एक अविस्वस्नीय क्षमता होती हैं। अच्छा तथा पौष्टिक खाना खाने से हमारा immune system मजबूत होता हैं जिससे हम लम्बे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं।

Immune system को मजबूत करने के लिए हम कुछ उपाय कर सकते हैं जैसे:-

तनाव रहित जीवन जीना

अच्छा तथा पौष्टिक भोजन लेना

नियमित रूप से वयायाम करना

Autoimmune Diseases क्या होती हैं?

किसी भी रोग से लड़ने में हमारे IMMUNE SYSTEM का एक अहम योगदान होता हैं। हमारी ख़राब जीवनशैली या खानपान की गलत आदतो के कारण हमारा immune system कमजोर होता जाता हैं। जिससे वह रोगों से लड़ने की क्षमता खो देता हैं। ऐसे में जो रोग उत्पन्न होते हैं उन्हें Autoimmune Diseases कहा जाता हैं। ऑटोइम्यून रोग तब होता है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली विफल हो जाती है और एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देती है। शरीर के कुछ ऊतकों के खिलाफ प्रतिक्रिया। इसका शरीर पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है और कई मामलों में यह घातक भी साबित हो सकता है।

एक ऑटोइम्यून प्रक्रिया एक विशेष प्रकार की कोशिका या ऊतक के विनाश का कारण बन सकती है। किसी अंग के अत्यधिक बढ़ने का कारण बन सकती है, और यहां तक ​​कि अंगों की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। अंतःस्रावी ग्रंथियां(Endocrine Glands) ज्यादातर इस तरह की बीमारी से प्रभावित होती हैं। आम तौर पर लाल रक्त कोशिकाएं(Red Blood cells) , अधिवृक्क ग्रंथियां(Adrenal glands) , थायरॉयड, अग्न्याशय(Pancreas), संयोजी ऊतक(Connective Tissues) और कई त्वचा और मांसपेशियों के जोड़(Muscles Joints) इस बीमारी से प्रभावित होते हैं । पुरुषों की तुलना में महिलाएं मे ऑटो इम्यून रोग (Autoimmune Diseases) जायदातर पाये जाते हैं। इसका कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।

इसका एक मुख्य कारण यह भी हो सकता है कि सभी प्रकार की बीमारियों के लिए पुरुषों की तुलना में महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक होती है। इसलिए महिलाये Autoimmune Diseases के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।

Autoimmune Diseases कितने प्रकार की होती हैं?

ऑटोइम्यून बीमारियां (Autoimmune Diseases) 2 प्रकार की होती हैं:-

टाइप 1: गैर अंग विशिष्ट(Non organ specific)

टाइप 2: अंग विशिष्ट(Organ specific)

गैर अंग विशिष्ट(Non organ specific):- AutoImmune Diseases

इस प्रकार की बीमारी पूरे शरीर में फैल सकती है। इसके कुछ उदहारण हैं:- मायस्थेनिया ग्रेविस ( Myasthenia Gravis) , मल्टीपल स्केलेरोसिस(Multiple Sclerosis) , ल्यूपस(Lupus) और रुमेटीइड गठिया ( Rheumatoid Arthritis)

मायस्थेनिया ग्रेविस( Myasthenia Gravis):-AutoImmune Diseases

मायस्थेनिया ग्रेविस (एमजी) एक न्यूरोमस्कुलर विकार(Neuromuscular Disorder) है जो कंकाल की मांसपेशियों (Skeletal Muscles) में कमजोरी का कारण बनता है, skeletal Muscles हमारे शरीर की गतिविधिओं के लिए बहुत ही जरूरी होती हैं । Myasthenia Gravis तब होता है जब तंत्रिका कोशिकाओं (Nerve Cells) और मांसपेशियों (Muscles) के बीच संचार खराब हो जाता है।

NIH के अनुसार मायास्थेनिया ग्रेविस एक पुरानी ऑटोम्यून्यून, न्यूरोमस्कुलर बीमारी है जिसके कारण कंकाल की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है।

मल्टीपल स्केलेरोसिस(Multiple Sclerosis):-AutoImmune Diseases

यह एक ऐसी बीमारी जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली नसों के सुरक्षात्मक कवच को खा जाती है। जिससे परिणामस्वरूप तंत्रिका क्षति (Nerve Damage) के कारण मस्तिष्क और शरीर के बीच संचार बाधित हो जाता है।

मल्टीपल स्केलेरोसिस के कई अलग-अलग लक्षणों भी हो सकते हैं:-

दृष्टि हानि(Vision Loss)

दर्द(Pain)

थकान(Tiredness)

बिगड़ा हुआ समन्वय(Impaired Coordination)

ये लक्षण और इनकी गंभीरता और अवधि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकती है।

फिजियोथेरेपी और दवाएं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रण में कर सकती हैं, लक्षणों में मदद कर सकती हैं और रोग की प्रगति को धीमा कर सकती हैं।

ल्यूपस(Lupus):-AutoImmune Diseases

एक सूजन(Inflammatory) वाली बीमारी होती है। यह तब होती हैं जब प्रतिरक्षा प्रणाली(Immune System) अपने स्वयं के ऊतकों(Tissues) पर हमला करती है।

ल्यूपस (एसएलई) हमारे शरीर के कई अंगो को प्रभावित कर सकता हैं जैसे :-जोड़ों(Joints) , त्वचा(Skin) , गुर्दे(Kidneys) , रक्त कोशिकाओं(Blood Cells) , मस्तिष्क(Brain) , हृदय(Heart) और फेफड़ों(Lungs)।

Lupus के लक्षण हर मरीज में अलग-अलग होते हैं लेकिन इसमें थकान, जोड़ों का दर्द, दाने और बुखार सभी में शामिल हो सकते हैं। ये समय के साथ और खराब हो सकते हैं या समय के साथ सुधर भी सकते हैं।

जबकि ल्यूपस का कोई इलाज नहीं है परन्तु वर्तमान में कुछ उपचार हैं जो लक्षणों को नियंत्रित करते हैं और सूजन को कम करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं। यह जीवनशैली में बदलाव के साथ शुरू होता है, जिसमें सूरज की ultraviolet किरणों से सुरक्षा और आहार में कुछ बदलाव शामिल हैं। इसके अलावा रोग प्रबंधन में एंटी-इंफ्लेमेटरी और स्टेरॉयड जैसी दवाएं सिर्फ डॉक्टर की सलाह से ही ले सकते हैं।

गठिया (Rheumatoid Arthritis):- AutoImmune Diseases

यह एक पुराना सूजन संबंधी विकार हैं जो हाथों और पैरों सहित शरीर के कई जोड़ों को प्रभावित करता हैं।

Rheumatoid Arthritisमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने स्वयं के ऊतकों पर हमला करती है। जिसमे सबसे ज्यादा शरीर के जोड़ प्रभावित होते हैं। गंभीर मामलों में, यह आंतरिक अंगों पर हमला करता है।

गठिया (Rheumatoid Arthritis) शरीर के जोड़ों को बहुत प्रभावित करता है। जिससे दर्दनाक सूजन होती है। अगर लंबे समय तक, रूमेटोइड गठिया रह जाय तो यह सूजन हड्डी के क्षरण (Bone Erosion) और जोड़ों की विकृति (Joint Deformity) का कारण बन सकती है।

जबकि रूमेटोइड गठिया (Rheumatoid Arthritis) का कोई इलाज नहीं है। फिजियोथेरेपी और दवा के प्रयोग से रोग की प्रगति को धीमा किया जा सकता हैं। अधिकांश मामलों में एंटी-रूमेटिक ड्रग्स (डीएमएआरडीएस) दवाओं का इस्तेमाल करके इस रोग को निंयत्रित किया जा सकता हैं।

Type-II

अंग विशिष्ट(Organ specific):-यह Autoimmune Disease का दूसरा प्रकार हैं। यह Autoimmune Disease शरीर के किसी विशेष अंग को प्रभावित करती है। अंग विशिष्ट विकारों में से कुछ हैं:

क्रोनिक हेपेटाइटिस(Chronic Hepatitis)-AutoImmune Diseases

इस बीमारी में सिर्फ यकृत(Liver) प्रभावित होता है। क्रोनिक हेपेटाइटिस को यकृत की सूजन भी कहा जाता है जो कम से कम 6 महीने तक रहती है। सामन्यतः हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) और सी वायरस इसके कारण होते हैं परन्तु कुछ दवाओं का Side Effect भी इसका कारण हो सकता हैं। अधिकांश लोगों में Chronic Hepatitis के कोई शुरुवाती लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, या कुछ में अस्पष्ट लक्षण होते हैं लेकिन समय की साथ साथ ये लक्षण उभरने लगते हैं। खराब भूख और लगातार थकान इसके मुख्य लक्षण होते हैं। धीरे धीरे ये समस्या का रूप धारण कर लेते हैं।

Addison’s Disease (एडिसन की बीमारी):-AutoImmune Diseases

Addison’s disease एक Autoimmune Disease हैं जो हमारी एड्रेनल ग्रंथियों (Adrenal Glands) को प्रभावित करती है। इस बीमारी में हमारा Adrenal Gland पर्याप्त मात्रा में Hormones नहीं बना पाता हैं। अधिवृक्क ग्रंथियां (Adrenal Glands) कभी कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन और कभी-कभी एल्डोस्टेरोन (Aldosterone) हार्मोन की अपर्याप्त मात्रा का उत्पादन करती हैं।

इसके लक्षण थकान, मतली, त्वचा का काला पड़ना और खड़े होने पर चक्कर आना हो सकते हैं।

मधुमेह (Diabetes ):- AutoImmune Diseases

डायबिटीज भी एक Autoimmune Disease होती हैं। यह हमारी पैनक्रिया को प्रभावित करती है। इसमें हमारी Pancreas Insulin का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन नहीं कर पाती हैं जिसके कारण हमारा Blood Sugar लेवल बढ़ने लगता हैं।

शोधकर्ताओं का मानना ​​​​है कि ऐसे कई कारक हैं जिन्हें ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। ड्रग्स, प्रदूषण, कुछ प्रकार के वायरस, आनुवंशिकता इसके कुछ जिम्मेदार कारण हैं। कई डॉक्टर यह भी मानते हैं कि निकट विवाह या परिवार के सदस्यों से शादी करना भी ऑटो इम्यून रोगों का एक प्रमुख कारक हो सकता है।

डॉक्टर आपके रक्त के नमूनों की जांच, रेडियोलॉजिकल अध्ययन आदि जैसे विभिन्न परीक्षण करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आपको ऑटोइम्यून बीमारी है या नहीं। वहाँ ऑटो प्रतिरक्षा रोग के साथ लक्षण प्रत्येक बीमारी के लिए अलग अलग हो सकते हैं।

सामान्य लक्षण बुखार, कोई संक्रमण, थकान, चक्कर आना और भूख न लगना होते हैं।

ज्यादातर ऑटोइम्यून बीमारियों का इलाज लक्षणों के हिसाब से किया जा सकता है। डॉक्टर कॉर्टिकोस्टेरॉइड ड्रग्स, नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) और कुछ बहुत शक्तिशाली इम्यूनोसप्रेसेन्ट ड्रग्स जैसे साइक्लोफॉस्फेमाइड, एज़ैथियोप्रिन और मेथोट्रेक्सेट लिखते हैं जो ऑटोइम्यून बीमारी की प्रगति से प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया को दबा देते हैं।

आत्म-देखभाल के अलावा कोई सर्वोत्तम उपाय नहीं है। यदि कोई अस्वस्थ जीवन व्यतीत किए बिना स्वयं की उचित देखभाल करता है तो इन बीमारियों को रोका जा सकता है। डॉक्टर विटामिन और खनिजों से भरपूर आहार की सलाह देते हैं जो ऑटो इम्यून रोग के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है।

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